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How will be your job or business, know from Jupiter/Guru .

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देव गुरु बृहस्पति की क्या भूमिका है . बृहस्पति को हमारे शास्‍त्रों में देवगुरु का दर्जा प्राप्त है। उनको सभी ग्रहों में सर्वोपरि मानते हुए उनकी पूजा की जाती है। इस वजह से इसे पूर्ण रूप से सात्विक ग्रह भी कहा गया है। माना जाता है क‍ि जो व्यक्ति बृहस्पति के प्रभाव में होता है उसका जीवन भी कुछ इसी तरह का होता है।  देखने में आया है क‍ि गुरु से प्रभावित व्यक्ति आजीवन धार्मिक प्रवृत्ति के रहते हैं और विज्ञान में भी इनकी रुचि रहती है। इनके बाल और आंखें भूरे या सुनहरे होती हैं। साथ ही इनको झूठ से घृणा होती है और इन्हें हमेशा सत्य बोलने वाला और इसका साथ देने वाला माना जाता है। ज्योतिष विद्या के अनुसार धनु और मीन राशि का स्वामी गुरु ग्रह है और पुनर्वसु, विशाखा, पूर्वाभाद्रपद, गुरु के नक्षत्र माने गए हैं। बृहस्पति ग्रह पवित्र और सात्विक है, जो लोग इनके प्रभाव में होते हैं उनके भीतर भी सदगुण मौजूद होते हैं। वे न्याय प्रिय भी माने जाते हैं। ऐसे लोग कहीं भी होंगे, सभी की भलाई का सोच कर अपने कदम उठाते हैं।  ज्योतिष के अनुसार वे लोग जो गुरु के प्रभाव में होते हैं उन्हें कफ संबंधित...

Earthquake, what are its astrological reasons ?

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भूकंप, क्या हैं इसके ज्योतिषीय कारण ज्योतिष न केवल किसी मनुष्य का वरन संपूर्ण पृथ्वी का भविष्य बता सकता है। इसका कारण है कि संपूर्ण ज्योतिष अंतरिक्ष में विस्तृत ग्रह- इसका अकाट्य प्रमाण है धरती पर स्थित समुद्र पर चन्द्रमा से उठने वाले ज्वार। इसी तरह सूर्य ग्रहण के समय भी समस्त पृथ्वी पर प्रभाव पड़ता है। इसलिए प्राचीन ज्योतिष विद्या धरती पर आने वाली प्राकृतिक आपदाएं जैसे भूकंप, बाढ़, तूफान के बारे में सचेत कर सकती हैं।  हाल ही में नेपाल में आए भयानक भूचाल के समय भी कुछ ऐसे ही अशुभ योग बने थे। जिस समय वहां भूकंप आया, उस समय पुनर्वसु नक्षत्र चल रहा था। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। गुरु वर्तमान में कर्क राशि में उच्च का है। मंगल अपनी स्वयं की राशि मेष में है। शनि-मंगल के स्वामित्व वाली राशि वृश्चिक में गोचर हो रहा है। मंगल की पूर्ण अष्टम दृष्टि शनि पर पड़ रही है। मंगल की चतुर्थ पूर्ण दृष्टि गुरु पर है। सूर्य और मंगल के साथ मेष राशि में युति बनाए हुए है। नेपाल में 15 जनवरी 1934 को भी भूकंप आया था। उस दिन अमावस्या तिथि थी। उत्तराषाढ़ा नक्षत्र था, जिसका स्वामी सूर्य है। सूर्य, ...

Do these yogas of the horoscope make a person mad ?

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क्या कुंडली के ये योग बनाते हैं इंसान को पागल? शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ ज्योतिष शास्त्र में ग्रह व नक्षत्रों के बारे में बहुत कुछ बताया गया है। इसी के साथ इसकी मदद से कोई भी व्यक्ति अपनी कुंडली से संबंधित हर तरह की जानकारी ले सकता है। यही कारण है लोग ज्योतिष शास्त्रों के पास जाते हैं और अपने भविष्य के बार में जानते हैं। इतना ही नहीं ज्योतिष शास्त्र की मदद से कुंडली के उन योगों के बारे में भी पता लगाया जा सकता है कि किन हालातों में व्यक्ति पागल बनता है। जी हां, ऐसा कहा जाता है कि कुंडली में कुछ ऐसे योग होते हैं जिस कारण व्यक्ति के पागल बनाने की संभावना अधिक बढ़ जाती है। कहा जाता है किसी को पागलपन की बीमारी बचपन से होती है तो किसी को उम्र के बढ़ने पर इस परेशानी का सामना करना पड़ता है। मगर ज्योतिष शास्त्र की मानें तो कुंडली में ये योग बनते हैं तो कोई न कोई संकेत ज़रूर मिलते हैं। ऐसे में अगर कुछ खास बातों का ध्यान रखा जाए तो ऐसे लोगों को सावधान रहने की ज़रूरत होती है। आमतौर पर बात करें तो कुंडली में सभी नौ ग्रह अपनी-अपनी प्रकृति के अनुसार किसी न किसी रोग की सूचना देत...

Do you have negative energy in your house too ?

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क्या आपके घर में भी नेगेटिव एनर्जी है?  बिना बात के घर में बेचैनी रहती है, घर में आते ही मूड खराब हो जाता है, घर की चीजें जल्दी-जल्दी खराब होती है। पूजा पाठ में मन नहीं लगता है। आपस में तनाव बना रहता है तो आपके घर में नकारात्मक ऊर्जा है। इसे दूर करने के अचूक उपाय प्रस्तुत है।  * घर में नकारात्मक ऊर्जा के संकेत  दुनिया सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह की ऊर्जाओं से भरी है। लेकिन कोई भी अपने घर में किसी भी नेगेटिव वस्तु को अपने इर्द गिर्द देखना पसंद नहीं करता है। यदि घर में कोई बुरी ऊर्जा या शक्ति का साया होता है तो आपको कुछ संकेत मिल सकते हैं जैसे -  घर के सामान का टूटना -फूटना और इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स का बार-बार खराब होना।   परिवार के किसी सदस्य की बीमारी का लंबे समय तक इलाज के बाद भी ठीक न होना।  बिना वजह किसी बात पर परेशान होना और डिप्रेशन की स्थिति का होना।  किसी अच्छे कार्य या अच्छे अवसर की फल प्राप्ति के अंतिम चरण में ही अटक जाना।  घर के सभी सदस्यों का हर समय सुस्ती महसूस करना।  दिमाग में बार-बार नकारात्मक विचार आना और अपन...

What happens in Vish Yoga?

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शनि-चंद्र युति शनि व चंद्र यदि साथ में हो या आमने-सामने हो तो यह युति सहसा कष्टकारी मानी जाती है। चंद्रमा पर शनि का प्रभाव मानसिक शक्ति को क्षीण करता है, मानसिक तनाव व मानसिक रोगों की स्थिति को निर्मित करता है। व्यक्ति की इच्छाशक्ति व आत्मविश्वास कम होता जाता है, अत्यंत भावुकता के चलते व्यक्ति लक्ष्य की प्रवृत्ति भी कम होती है। अत: भाग्योदय देर से होता है।  ज्योतिष शास्त्र में शनि का जहां एक क्रूर और न्यायप्रिय ग्रह की श्रेणी में रखा गया है, वहीं चंद्रमा को मन का कारक बताया गया है. चंद्रमा का संबंध माता से भी है. चंद्रमा का स्वभाव चंचल बताया गया है. कुंडली में जब ये दोनों ग्रह एक साथ किसी भी तरह का संबंध बनाते हैं तो विष योग की स्थिति बनती है. विष योग में क्या होता है?  ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली में बनने वाला ये योग जीवनभर अशुभ फल प्रदान करता है. इस योग के बारे में कहा जाता है कि जब कुंडली में ये योग मौजूद हो तो ऐसा व्यक्ति यदि पालतु श्वान को भी यदि रोटी खिलाए तो भी उसे एक न एक दिन काट ही लेता है. इस योग का सबसे अशुभ फल यही है कि ऐसा व्यक्ति मित्र, सगे संबंध...

Happiness, splendor and prosperity in life Who is the causative planet ?

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जीवन में सुख, वैभव और समृद्धि का कारक ग्रह कौन है ? वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सभी 9 ग्रहों का अपना स्वभाव और गुण होता है, जो उन्हीं के अनुसार फल प्रदान करते हैं। वैदिक ज्योतिष में शु्क्र ग्रह को सुख,संपदा और ऐश्वर्य का कारक माना जाता है। शुक्र ग्रह को वृष और तुला राशि का स्वामी माना गया है। जिन जातकों की कुंडली में शु्क्र मजबूत भाव में बैठे होते हैं उन्हें सभी तरह की सुख समृद्धि और ऐशोआराम की सुविधा उनके जीवन में प्राप्त होती है। शु्क्र ग्रह के कुंडली में उच्च स्थिति में होने पर व्यक्ति को शारीरिक और मानसिक रूप से कष्ट नहीं झेलने पड़ते हैं। आइए जानते हैं कुंडली में शुक्र ग्रह के कमजोर और बली होने के लक्षण और कुछ  कारण. शुक्र का ज्योतिष में महत्व  वैदिक ज्योतिष में शुक्र को मुख्य रूप से पत्नी का का कारक माना गया है. यह विवाह का कारक ग्रह है, ज्योतिष में शुक्र से काम सुख, आभूषण, भौतिक सुख सुविधाओं का कारक ग्रह है. शुक्र से आराम पसन्द होने की प्रकृति, प्रेम संबन्ध, इत्र, सुगन्ध, अच्छे वस्त्र, सुन्दरता, सजावट, नृ्त्य, संगीत, गाना बजाना, काले बाल, विलासिता, व्यभिच...

What is the main astrological reason for obesity ?

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मोटापे का मुख्य ज्योतिषीय कारण क्या है ? ज्योतिष शास्त्र में मोटापा को ग्रह से जोड़कर देखा गया है। ज्योतिष के जानकार ऐसा मानते हैं कि अधिक मोटापे के लिए बृहस्पति ग्रह जिम्मेवार है। ज्योतिष के मुताबिक दो तरह के मोटे लोग होते हैं। एक मोटे होते हैं जो खाने की वजह से मोटे हो जाते हैं। साथ ही एक मोटे ऐसे होते हैं जिनके मोटापे की प्रवृत्ति होती है, इन दोनों में बड़ा फर्क है। जो खाने की वजाह से मोटे होते हैं उनकी कुंडली में जो लोभ वाला ग्रह है, जो लोभी बनाता है और भोजन की तरफ धकेलता है वह थोड़ा सा गड़बड़ होता है। और दूसरे वो होते हैं जिनकी प्रवृत्ति होती है मोटापे की। आगे जानते हैं कि ऐसे में मोटापे से निजात पाने के लिए ज्योतिष शास्त्र में क्या उपाय बताए गए हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार व्यक्ति के शरीर में जो मोटापा का कारक ग्रह होता है, वह है बृहस्पति। बृहस्पति मोटापा या शरीर में चर्बी का मालिक होता है। इसलिए जब बृहस्पति प्रधान कुंडली हो तो ऐसे में मोटापा होने की संभावना अधिक होती है। साथ ही बृहस्पति यदि खाने वाले भाव को प्रभावित करने लगे या खाने वाले भाव से भी उसका संबंध हो तो व्यक्...

What is Pradosh Vrat, why do Pradosh Vrat, what is the importance of Pradosh Vrat?

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प्रदोष व्रत क्या है, प्रदोष व्रत क्यों करते हैं, प्रदोष व्रत का महत्व क्या है ? हर माह के दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है इसी कारण प्रदोष व्रत को त्रयोदशी व्रत के नाम से भी जाना जाता हैं। यह व्रत माता पार्वती और भगवान शिव को समर्पित है। प्रदोष व्रत को मुख्य रूप से भगवान शिव की कृपा पाने हेतु किया जाता है. इस दिन पूरी निष्ठा से भगवान शिव की आराधना करने से जातक के सारे कष्ट दूर होते हैं और मृत्यु के बाद उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। पुराणों के अनुसार प्रदोष व्रत को करने से बेहतर स्वास्थ्य और लम्बी आयु की प्राप्ति होती है। शास्त्रों के अनुसार प्रदोष व्रत प्रतिवर्ष 24 बार आता है अर्थात यह व्रत प्रायः महीने में दो बार आता है। प्रत्येक मास के शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी के दिन प्रदोष व्रत का पालन किया जाता है। प्रदोष व्रत की महिमा ऐसी है जैसे अमूल्य मोतियों में “पारस” का होना। प्रदोष व्रत जो भी व्यक्ति नियमित करता है उस व्यक्ति के जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और दुखों का नाश होता है। अलग-अलग वार का त्रयोदशी तिथि के साथ संगम होने से पड़ने वाले प्...

हनुमान चालीसा पढ़ने के नियम एवं महत्व क्या है ?

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हनुमान चालीसा पढ़ने के नियम एवं महत्व क्या है ? हनुमान चालीसा का पाठ करने के भी होते हैं नियम, भूलकर भी न करें गलती अन्यथा भक्तों को इसका शुभ फल नहीं मिल पाता।  मंगलवार का दिन संकटमोचन हनुमान जी को समर्पित है। यह दिन हनुमान जी के भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है। ऐसी मान्यता है कि, कलियुग में एक मात्र हनुमान जी ही जीवित देवता हैं। कहते हैं हनुमान जी की कृपा से ही तुलसीदास जी को भगवान राम के दर्शन हुए थे। हनुमान जी के बारे में यह भी कहा जाता है कि जहां कहीं भी रामकथा होती है हनुमान जी वहां किसी न किसी रूप में जरूर मौजूद रहते हैं। हनुमान जी की महिमा और भक्तहितकारी स्वभाव को देखते हुए तुलसीदास जी ने हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए हनुमान चालीसा लिखा है। इस चालीसा का नियमित पाठ बहुत ही सरल और आसान है। लेकिन सरल होने के बाद भी हनुमान चालीसा का पाठ पूरे नियम से करने चाहिए। हनुमान चालीसा का पाठ करने का भी खास तरीका होता है अन्यथा भक्तों को इसका शुभ फल नहीं मिल पाता। आइए जानते हैं क्या हैं वो नियम।   हनुमान चालीसा का महत्व और अर्थ भगवान हनुमान को समर्पित सबसे लोकप्र...