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Tulsi worship has special importance in Navratri.

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नवरात्र में तुलसी पूजा का विशेष महत्व है ! तुलसी का पौधा हिंदू धर्म में तुलसी के पौधे का विशेष महत्व है और इस पौधे को बहुत ही शुभ माना जाता है. कहा जाता है कि नवरात्रि के दौरान घर में तुलसी का पौधा लगाना बेहद शुभ होता है. स्वच्छता के साथ इस पौधे को घर में लगाने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं. जिससे घर की आर्थिक स्थिति में सुधार होता है और पैसे की दिक्कत ख़त्म होती है. लेकिन तुलसी का पौधा लगाने के बाद इस बात का ध्यान रखें कि रविवार और एकादशी को छोड़कर रोज़ाना तुलसी के पौधे में जल चढ़ाएं. साथ ही शाम के समय तुलसी के पास घी का दीपक भी जलाएं. हिन्दू धर्म में तुलसी को बहुत ही पवित्र माना जाता है. माना जाता है कि तुलसी के पौधे में मां लक्ष्मी का वास होता है. जिस घर में तुलसी का पौधा होता है वहां मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की कृपा दृष्टि बनी रहती है. नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना होती है, लेकिन अगर आपके घर में तुलसी है तो नवरात्रि के दौरान कुछ काम जरूर करें. इन्हें करने से मां दुर्गा के साथ-साथ मां लक्ष्मी का भी आशीर्वाद प्...

Know the origin of cancer in human body and its remedies through Astro Medical.

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एस्ट्रो मेडिकल के माध्यम से जानिए मानव शरीर में कैंसर की उत्पत्ति और उसके उपाय। एस्ट्रो मेडिकल के माध्यम से जानिए मानव शरीर में कैंसर की उत्पत्ति और उसके उपाय। मानव शरीर में कैंसर की उत्पत्ति में कोशिकाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।  कोशिकाओं में सफेद और लाल रक्त कोशिकाएं होती हैं।  ज्योतिष शास्त्र में श्वेत रक्त कणिकाओं की राशि कर्क राशि का स्वामी चंद्रमा और लाल रक्त कणिकाओं की राशि मंगल है।  कर्क राशि का अंग्रेजी नाम कर्क है और इसकी राशि क्रैब है।  केकड़े की प्रकृति यह होती है कि वह जिस स्थान को अपने पंजों से पकड़ लेता है, उसी का साथ छोड़ देता है।  इसी प्रकार मनुष्य के शरीर का वह भाग जो कोशिकाएं अपना स्थान लेती हैं, कोशिकाओं को हटाकर ही शरीर से निकाला जाता है।  इसलिए ज्योतिष शास्त्र में कर्क जैसी भयानक बीमारी के लिए कर्क राशि के स्वामी चंद्रमा का विशेष महत्व है। जन्म कुंडली में अशुभ ग्रहों का प्रभाव जन्म कुण्डली में जब अधिकांश पाप ग्रहों का प्रभाव किसी एक भाव विशेषकर शनि, राहु और मंगल पर पड़ता है तो उस भाव में कैंसर रोग होने की प्रबल सम्भावन...

Placing Toran (Bandhanwar) at the door ,What is the importance of

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द्वार पर तोरण (बंधनवार) लगाने का क्या महत्व है! नवरात्रि के दिनों में लोग अपने घर की साफ-सफाई करने के साथ उसे ट्रेडिशनल तरीके से डैकोरेट भी करती हैं। वहीं, फेस्टिवल में लोग मुख्य द्वार पर आम, गेंदे आदि तोरण यानि बंदनवार भी लगाते हैं। मगर, क्या आप जानते हैं कि मुख्य द्वार पर तोरण क्यों लगाई जाती है। यहां हम आपको यही बताएंगे कि मुख्य द्वार पर तोरण क्यों लगाई जाती है और इसे लगाने का महत्व क्या है... क्यों लगाया जाता है तोरण? पुराने समय से शादी, त्यौहार, दीवाली, बच्चे के जन्म या किसी भी शुभ मौके पर घर के मुख्य द्वार पर बंदनवार लगाने की परंपरा चली आ रही है। मान्यता है कि मुख्य द्वार पर तोरण लगाने से नाकारात्मक ऊर्जा घर के अंदर प्रवेश नहीं करती। अलग-अलग तोरण लगाने के फायदे आम के पत्तों का तोरण मांगलिक कार्यों में आम के पत्तों घर के मुख्य द्वार पर आम के पत्तों का तोरण लगाया जाता है। माना जाता है कि इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा आता है और शुभ काम में कोई विघ्न नहीं आता। साथ ही इससे घर में सुख व समृद्धि भी बनी रहती है। गेंदे के फूल का तोरण गेंदे के फूल का संबंध बृहस्पति ग्रह से होता ह...

Importance, characteristics and way of celebrating Hindu New Year

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हिन्दू नववर्ष का महत्व, विशेषताएं और मनाने का तरीका हिन्दू नववर्ष की विशेषताएँ हिन्दू नववर्ष हजारों वर्षो से हिन्दू धर्म के सबसे पवित्र एवं महत्वपूर्ण दिनों में शामिल रहा है। हिन्दू धर्म में नववर्ष को नवीनता का प्रतीक माना गया है एवं इस अवसर पर पूजा-पाठ एवं विभिन प्रकार के शुभ कार्यो को करने की परंपरा रही है। हिन्दू नववर्ष को विक्रम संवत कैलेंडर के आधार पर मनाया जाता है जिसकी शुरुआत उज्जैन के महान शासक विक्रमादित्य द्वारा शकों को पराजित करने के उपलक्ष में 58 ई. पू. (58 B.C) में की गयी थी। वैज्ञानिक पद्धति से तैयार किया गया विक्रम संवत कैलेंडर पूर्ण रूप से वैज्ञानिक गणना पर आधारित है जहाँ नववर्ष को प्रतिवर्ष चैत्र माह में मनाया जाता है। चैत्र माह में प्रकृति में चारों ओर उत्साह एवं सौंदर्य प्रदर्शित होता है एवं बसंत ऋतु का आगमन होता है। हिन्दू नववर्ष के अवसर पर सम्पूर्ण प्रकृति ही नए साल का स्वागत करने के लिए तैयार प्रतीत होती है। आध्यात्मिक दृष्टि से भी हिन्दू नववर्ष को अत्यंत पवित्र दिवस के रूप में मनाया जाता है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को सृष्टि का निर्माण हुआ था था, इसलिए इ...

Importance of Ghat (Kalash) installation

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घट (कलश) स्थापना का महत्व  कलश को सुख- समृद्धि, ऐश्वर्य देने वाला तथा मंगलकारी माना जाता है। कलश के मुख में भगवान विष्णु, गले में रुद्र, मूल में ब्रह्मा तथा मध्य में देवी शक्ति का निवास माना जाता है। नवरात्रि के समय ब्रह्मांड में उपस्थित शक्तियों का घट में आह्वान करके उसे कार्यरत किया जाता है। इससे घर की सभी विपदादायक तरंगें नष्ट हो जाती हैं तथा घर में सुख-शांति तथा समृद्धि बनी रहती है।  घटस्थापना की सामग्री : जौ बोने के लिए मिट्टी का पात्र, यह वेदी कहलाती है। जौ बोने के लिए शुद्ध साफ की हुई मिट्टी जिसमें कंकर आदि न हो। पात्र में बोने के लिए जौ (गेहूं भी ले सकते हैं), घटस्थापना के लिए मिट्टी का कलश (सोने, चांदी या तांबे का कलश भी ले सकते हैं।), कलश में भरने के लिए शुद्ध जल, गंगाजल, रोली, मौली, इत्र व पूजा में काम आने वाली साबुत सुपारी, दूर्वा, कलश में रखने के लिए सिक्का (चांदी या सोने का सिक्का भी रख सकते हैं), पंचरत्न (क्षमता अनुसार : हीरा, नीलम, पन्ना, माणक और मोती), पीपल, बरगद, जामुन, अशोक और आम के पत्ते (सभी न मिल पाए तो कोई भी 2 प्रकार के पत्ते ले सकते हैं), क...

Maa favorite food is different every day in Navratri

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मां के नव नवरात्रि में हर दिन का मां का प्रिय भोग अलग होता है नवरात्र हिंदू धर्म का एक खास और महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। चैत्र नवरात्र इस वर्ष 22 मार्च दिन  बुधवार से शुरू होगी और 30 मार्च  दिन बृहस्पतिवार तक पूरे 9 दिनों की रहेगी। चैत्र नवरात्र पर इस बार कई शुभ योग भी बन रहे हैं। इस बार चैत्र नवरात्र में पांच सर्वार्थ सिद्धि, दो रवि योग का विशेष संयोग बन रहा है। इस शुभ योग में मां भवानी की पूजा करने पर विशेष फल की प्राप्ति होती है। वैसे तो माता को सच्चे मन से जो भी भोग लगाओ, वह ग्रहण कर लेती है लेकिन माता दुर्गा को नवरात्र को यह 9 भोग पसंद हैं। मान्यता है कि जगत जननी को इनका भोग लगाने से मनोकामना की पूर्ति होती है। साथ ही बुद्धि व धन-संपदा की भी वृद्धि होती है। आइए जानते हैं किस दिन माता को कौन सा भोग लगाएं... माता का पहला स्वरूप नवरात्र के पहले दिन मां के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री की पूजा होती है। इस दिन मां को गाय के घी भोग लगाने चाहिए। इससे आरोग्य लाभ की प्राप्ति होती है। माता का दूसरा स्वरूप नवरात्र के दूसरे दिन मां के द्वितीय स्वरूप ब्रह्मचारिणी की पूजा ...

These 10 things should not be done during Navratri .

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नवरात्रि में दाढ़ी-मूंछ और बाल नहीं कटवाने चाहिए..? नवरात्रि के दिन बहुत विशेष होते हैं और इन दिनों में बहुत से कामों को करना निषेध होता है. ऐसे में नवरात्रि का पर्व हर किसी के ले बहुत ख़ास होता है और यह पर्व माँ दुर्गा की आराधना करने का होता है. ऐसे में नवरात्र में मां के नौ स्वरुपों की पूजा की जाती है वह भी नौ दिनों तक. इस दौरान सभी जगह व्रत, पूजा पाठ का माहैल रहता है और सभी मां दुर्गा की भक्ति में डूबे रहते हैं. इस समय सभी भक्त नौ दिन तक उपवास करते हैं और मां की मूर्ति की स्थापना करते हैं इसी के साथ वह कलश स्थापित करते हैं और उस दौरान कई नियमों का पालन भी करते हैं. आपको बता दें कि नवरात्रि पर देवी पूजन और नौ दिन के व्रत का बहुत महत्व है और इन नौ दिनों में व्रत रखने वालों के लिए कुछ नियम होते हैं. कहा जाता है नवरात्रि में नौ दिन का व्रत रखने वालों को इस व्रत के दौरान दाढ़ी-मूंछ और बाल नहीं कटवाने चाहिए. अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर ऐसा क्यों..? तो आइए हम आपको बताते हैं कि ऐसा क्यों..? कहा जाता है नवरात्रि के नौ दिन माता दुर्गा के होते हैं और इन दिनों केवल पूजा और पाठ करना च...