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Due to which planetary combination Is it and when does transfer take place ?

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किस ग्रह योग के कारण होता  है और कब होता है तबादला या स्थानांतरण (Transfer) ? अगर आप नौकरी में हैं या सरकारी सेवा में हैं तो आपको नौकरी में तबादलों के लिए तैयार रहना चाहिए। स्थानांतरण (Transfer) बहुत चुनौतीपूर्ण होते हैं क्योंकि आपको न केवल अपना पेशेवर आधार बदलना पड़ता है बल्कि आपको अपने परिवार के सदस्यों और विशेष रूप से पढ़ाई में शामिल बच्चों के लिए स्थान बदलना पड़ता है। यदि आप एक अच्छे स्थान पर नहीं हैं तो आप कुंडली में स्थानान्तरण योग की तलाश करते हैं और यदि आप एक अच्छे स्थान पर हैं तो आप फिर से वैदिक ज्योतिष मे स्थानान्तरण की संभावना तलाशते हैं।  ज्योतिष के लिए धन्यवाद, हम ज्योतिष में स्थानांतरण (Transfer) योग से लेकर कुंडली में नौकरी परिवर्तन और यहां तक ​​कि प्रत्येक राशि के लिए सर्वश्रेष्ठ करियर के संबंध में सब कुछ सीख सकते हैं । हम नौकरी स्थानांतरण (Transfer) के लिए विभिन्न प्रकार के ज्योतिषीय योगों के आधार पर वैदिक ज्योतिष में नौकरी परिवर्तन का समय भी पता कर सकते हैं। अनुभवी ज्योतिषी जन्म तिथि से नौकरी परिवर्तन की भविष्यवाणी कर सकते हैं। और यदि आप प्रशासन म...

Career should be selected on the basis of planets.

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ग्रहों के आधार पर करना चाहिए कैरियर का चयन. ज्योतिष हमें जीवन के महत्वपूर्ण आयामों पर चयन करने में भी मददगार साबित हो सकता है। अभिभावकों को इस बात पर काफी ध्यान देना चाहिए कि बच्चों की कुंडली में कौन से ग्रहों का वर्चस्व उनके चतुर्थ भाव और पंचम भाव पर है। ग्रहों और नक्षत्रों के आधार पर ज्योतिष शास्त्र में आपके आने वाले भविष्य और भूतकाल का अध्ययन किया जाता है।  ज्योतिष हमें जीवन के महत्वपूर्ण आयामों पर चयन करने में भी मददगार साबित हो सकता है। अभिभावकों को इस बात पर काफी ध्यान देना चाहिए कि बच्चों की कुंडली में कौन से ग्रहों का वर्चस्व उनके चतुर्थ भाव और पंचम भाव पर है, जिसके आधार पर आप उनके उच्च शिक्षण के लिए विषयों का चयन कर सकते हैं। ग्रहों का करियर पर प्रभाव सूर्य- सूर्य उर्जा एवं शक्ति का स्वामी है। यह प्रबंधन, चिकित्सा व राजनैतिक क्षेत्रों में सरलता से ख्याति प्रदान करता है। इसके अलावा इस ग्रह से संबंधित लोग तर्क शास्त्री एवं अच्छे वकील भी हो सकते हैं। मंगल: मंगल उर्जा, शक्ति एवं साहस का स्वामी है। यह प्रशासनिक एवं सैन्य प्रतिभा प्रदान करता है। इस ग्रह से संबंधित लो...

Is the Disease of doubt the influence of the planets ?

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शक की बीमारी कहीं ग्रहों का प्रभाव तो नहीं है ? सामाजिक, पारिवारिक और दांपत्य जीवन में विश्वसनीयता बहुत आवश्यक है। यदि छोटी-छोटी बातों पर शक उत्पन्न हो गया तो रिश्तों में कड़वाहट और दरार पैदा हो जाती है। बात-बात पर शक करने के कारण किसी से भी नहीं बनती, कोई अपना नहीं होता या महसूस नहीं हो पाता जिसके फलस्वरूप मानसिक तनाव, अकेलापन तथा अविश्वास के कारण स्वस्थ्यगत परेशानियाॅ भी बढ़ जाती है। शक का कारण अगर हम ज्योतिषीय गणना द्वारा देखें तो शक बहुधा कमजोर मानसिकता को दर्शाता है। अतः यदि किसी का लग्नेश या तृतीयेश छठवे, आठवे या बारहवे स्थान में हो जाए अथवा तीसरे स्थान का स्वामी क्रूर ग्रहों से पापाक्रांत हो, तो ऐसे जातक को शक करने की आदत होती है। इसी प्रकार अगर किसी के लग्न, तीसरे अथवा एकादश स्थान का स्वामी बुध होकर विपरीतकारक हो तो नाकारात्मक विचार के कारण सभी को शक की नजर से देखते है। इसी प्रकार अगर शनि द्वादशेश या तृतीयेश होकर तीसरे स्थान पर प्रभाव डालें तो ऐसे लोगों को झूठ बोलेने की आदत होती है और ऐसे लोग दूसरों पर भी शक करते हैं। इसी प्रकार अगर शनि इन स्थानों पर होकर जिस स्थान ...

These signs tell which planet is having a bad effect on you.

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ये संकेत बताते हैं किस ग्रह का है आप पर बुरा प्रभाव पढ़ रहा है. ज्योतिष के अनुसार कुंडली में ग्रहों की अशुभ स्थिति के कारण ही हमें परेशानियों और असफलताओं का सामना करना पड़ता है। अशुभ प्रभाव देने वाले ग्रहों का उचित उपचार करने पर उनके बुरे फलों में कमी आती है, जिससे काफी हद तक मेहनत के बल पर हम उन्नति प्राप्त कर सकते हैं । यदि आपको भी जीवन में कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है बार-बार थूकने की आदत से वर्तमान और भविष्य के बिगड़ने की है मान्यता, जानिए कैसे ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली में सूर्य का राहु या शनि के साथ होना अच्छा नहीं माना जाता है। कहा जाता है कि ऐसे लोगों के मुंह में बार-बार थूक आने की समस्या खड़ी हो जाती है। कुछ लोगों में बार-बार थूकने की आदत पाई जाती है। सामान्य तौर पर इसे अच्छा नहीं माना जाता। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ज्योतिष शास्त्र में इसके कई नुकसान बताए गए हैं। जी हां, ज्योतिष की मानें तो बार-बार थूकने की आदत से आपके वर्तमान और भविष्य पर काफी बुरा असर पड़ता है। कहते हैं कि हम सबके मुंह में नियमीत रूप से स्राव आता रहता है जिसे थूककर बाहर निकाल द...

Seeing ants in the house is the effect of which planet ?

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घर में चीटियां देखना किस ग्रह का प्रभाव है ? शास्त्र में घर में बार-बार चीटियों का आना भविष्य में होने वाली घटनाओं का संकेत देती हैं. इनके रंग और घर में इनके आगमन के स्थान से पहचान सकते हैं कि ये संकेत शुभ है या अशुभ. आइए जानते हैंकाली चीटियों का घर में पश्चिम दिशा से निकलना जल्द विदेश यात्रा का संकेत देती है. काली चीटियों को ऐश्वर्य का प्रतीक माना जाता है.शास्त्रों के अनुसार जब चींटियां चावल के भरे बर्तन में से निकले तो यह शुभ माना जाता है. ये धन वृद्धि का संकेत होता है. ये आर्थिक तंगी दूर होने का इशारा करती हैं.लाल चीटियों का घर में प्रवेश करना अच्छा नहीं माना जाता है. कहते ये आने वाली बड़ी मुसीबतों जैसे धन हानि, विवाद का संकेत है. वैसे लाल चीटियां घर में होना शुभ नहीं होता लेकिन अगर ये लाल चीटियां मुंह में अंडा लेकर घर से जाते हुए दिखे तो ये शुभ संकेत होता है. कहते हैं ये घर से नकारात्मक ऊर्जा को अपने साथ ले जाती है. इसका अर्थ है जीवन में कुछ प्रगति होने वाली है. शास्त्रों के अनुसार घर में काली चीटियों का ऊपर की ओर जाने का मतलब होता है जीवन में विकास, सुख, शांति, समृद्धि ...

Role of venus in astrology What ?

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ज्योतिष में शुक्र ग्रह की भूमिका   क्या है ? वैदिक ज्योतिष में एक महत्वपूर्ण सूत्र है और वो है फलित विचार, दरअसल भविष्य में होने वाली किसी भी घटना के बारे में विचार करने को फलित विचार कहते हैं। फलित सूत्र में नॉर्मली 9 ग्रह, 12 भाव और 27 नक्षत्रों से विचार किया जाता है। फलित में 9 ग्रह है, सूर्य, चन्द्रमा, मंगल, बुध,गुरु, शुक्र,शनि  ये 7 मूल ग्रह माने गए हैं वहीं 2 ग्रह राहु केतु छाया ग्रह माने गए हैं। राहु केतु सदैव एक दूसरे से सप्तम होते हैं और विपरीत यानी वक्री गति से ही चलते हैं तो आइये जानते हैं शुक्र ग्रह के बारे में और साथ ही यह भी जानेंगे कि ज्योतिष में उसकी क्या उपयोगिता है।  वैदिक ज्योतिष में शुक्र एक बेहद महत्वपूर्ण ग्रह हैं जो कि सप्तम भाव यानी कि पत्नी के भाव के कारक होते हैं। इसी भाव से मनुष्य की काम इच्छा का विचार किया जाता है इसलिए कुंडली में शुक्र की भूमिका बड़ी महत्वपूर्ण हो जाती है। शुक्र देव वृषभ और तुला राशि के स्वामी होते हैं। तुला राशि इनकी मूल त्रिकोण राशि होती है जहां ये वृषभ राशि से अच्छे परिणाम देने में समर्थ होते हैं। शुक्र ग्रह...

If the deeds are bad, even the higher planets do not give their auspicious effect.

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कर्म बुरे हो तो उच्च ग्रह भी नहीं देते अपना शुभ प्रभाव कई जातकों के जन्मांग में एक से अधिक उच्च ग्रह होते हैं किंतु फिर भी उन्हें इसका पूर्ण शुभ प्रभाव नहीं मिलता। फिर वह ज्योतिषियों के पास भटकता रहता है और पूछता रहता है कि आखिर क्या कारण है कि उच्च ग्रह होने के बाद भी वह परेशानियों से घिरा हुआ है। इसका उत्तर ज्योतिष के ग्रंथ लाल किताब में मिलता है। लाल किताब के अनुसार जातक के कर्म बुरे होते हैं तो उच्च ग्रह भी अपना शुभ प्रभाव नहीं दिखा पाते हैं। उच्च ग्रह का व्यक्ति भी कभी-कभी अपने व्यवहार या दृष्टि से ग्रह के उच्च प्रभाव को खत्म कर देता है जिससे उच्च ग्रह भी नीच प्रभाव देने लगता है। आइए जानते हैं विस्तार से किस भाव में कौन-सा ग्रह उच्च होता है सूर्य - प्रथम भाव में चंद्र - द्वितीय भाव में राहु- तृतीय भाव में गुरु - चतुर्थ भाव में बुध - छठे भाव में शनि - सप्तम भाव में केतु - नवम भाव में मंगल - दशम भाव में शुक्र - द्वादश भाव में पंचम, अष्टम और एकादश भाव में कोई ग्रह उच्च नहीं होता है। सूर्य : जन्मांग में यदि उच्च सूर्य वाला जातक अनाचार, अत्याचार में लिप्त है, अपने उच्चाधिका...