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Astro Medical & Health

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बच्चों में मानसिक रोग उत्पन्न किन ग्रहों के कारण होता है ? एस्ट्रो मेडिकल और स्वास्थ्य एस्ट्रो मेडिकल के अनुसार प्रत्येक ग्रह का संबंध व्यक्ति के किसी न किसी अंग से है और इन ग्रहों का प्रभाव व्यक्ति के स्वास्थ्य पर पड़ता है। हिन्दू ज्योतिष के अनुसार जब कोई पीड़ित ग्रह लग्न, लग्नेश, षष्ठम भाव अथवा अष्टम भाव से सम्बन्ध बनाता है तो ग्रह से संबंधित अंग रोग से प्रभावित हो सकता है। एस्ट्रो मेडिकल के अनुसार छठे भाव के स्वामी का सम्बन्ध लग्न भाव लग्नेश या अष्टमेश से होना स्वास्थ्य के पक्ष से शुभ नहीं माना जाता है। जब छठे भाव का स्वामी एकादश भाव में हो तो रोग अधिक होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। इसी प्रकार छठे भाव का स्वामी अष्टम भाव में हो तो व्यक्ति को लंबी अवधि के रोग होने की अधिक संभावनाएं रहती हैं। यदि लग्नेश छठे या आठवें भाव में हो तो इस स्थिति में भी शारीरिक कष्ट रहने की संभावना रहती है। एस्ट्रो मेडिकल में मानसिक विकार और कारक ग्रहों का विस्तृत वर्णन प्राप्त होता है। ज्योतिष एक ऐसा माध्यम है जिसके द्वारा आधुनिक विज्ञान भी मानसिक रोगी की मनोदशा भी समझ सकता है। आज इस देश में...

Importance and method of Bhoomi Pujan

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भूमि पूजन का महत्व एवं विधि हर एक भारतवासी किसी भी महत्वपूर्ण कार्य की शुरुआत किसी शुभ दिन या तारीख़ पर करना चाहता है। उनका मानना होता है कि शुभ दिन पर शुरु किये गए कार्य में कोई बाधा नहीं आती। ज्योतिष शास्त्र में भी शुभ मुहूर्त का ज़िक्र है, जिससे किसी नए घर का निर्माण कार्य शुरु करने से पहले शुभ मुहूर्त निकाला जाता है। यही वजह है कि भूमि पूजन का मुहूर्त  जानना काफी महत्वपूर्ण है।  अधिकांश भारतीय कुछ भी नया शुरु करने से पहले भगवान का आशीर्वाद जरुर लेते हैं। इसलिए नए घर का निर्माण शुरू करने का शुभ समय जानने के बाद भूमि पूजन किया जाता है। अपने घर का निर्माण कार्य शुरू करने से पहले, भगवान का आशीर्वाद लेना हमेशा ही अच्छा होता है। ऐसे करें नींव की खुदाई  भूमि पूजन के बाद नींव की खुदाई ईशान कोण से ही प्रारंभ करें। ईशान के बाद आग्नेय कोण की खुदाई करें। आग्नेय के बाद वायव्य कोण, वायव्य कोण के बाद नैऋत्य कोण की खुदाई करें। कोणों की खुदाई के बाद दिशा की खुदाई करें। पूर्व, उत्तर, पश्चिम और दक्षिण में क्रम से खुदाई करें। भूमि पूजन क्या है  भूमि का अर्थ है पृथ्वी, और...

Importance of worship :according to the Puranas Somvati Amavasya.

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सोमवती अमावस्या आज सोमवती अमावस्या है। सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या  कहते हैं। यह अमावस्या हिन्दू धर्म में विशेष धार्मिक महत्व रखती है। इस अवसर पर जहां  हजारों श्रद्धालु शिप्रा, हरिद्वार कुंभ में डुबकी लगाएंगे, वहीं देश के सभी मंदिरों में भी  आस्थावानों का तांता लगेगा। ज्योतिष तथा धर्मशास्त्रों में सोमवती अमावस्या व शिप्रा  स्नान का विशेष महत्व बताया गया है।  सोमवती अमावस्या के दिन नदी, तट, तीर्थक्षेत्र में स्नान तथा दान आदि करने से अक्षय  फल की प्राप्ति होती है। सूर्योदय से लेकर दोपहर पश्चात नदी स्नान किया जा सकता है।  इस दिन विशेषकर गायों को चारा खिलाने तथा वस्त्र आदि दान देने का महत्व शास्त्रों में  उल्लेखित है। इसके अलावा स्नानार्थी तीर्थ पुरोहितों से भाल पर तिलक लगवाएंगे, वहीं  स्नान के समय श्लोक भी गूंजेंगे। तीर्थ पुरोहितों के अनुसार शिप्रा में स्नान करने से  मनोकामनाओं की सिद्धि होती है।  वहीं उज्जैन के सोम तीर्थ में स्नान करने वाले श्रद्धालुओं को विशेष फल मिलता है। उज्जैन  ही ऐसा शहर है, ...

What is Moon Rashi and Sun Rashi ?

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चन्द्र राशि और सूर्य राशि क्या है ? ग्रहों का हम सभी के जीवन पर बहुत प्रभाव पड़ता है।  अगर सितारे आपके पक्ष में हैं तो आप अपने हर लक्ष्य को बड़ी आसानी से हासिल कर सकते हैं।  यदि ग्रह प्रतिकूल हो जाए तो आप छोटी-छोटी चीजों के लिए भी तरस जाएंगे। हमारे जीवन का कोई भी क्षेत्र, चाहे वह वित्त, स्वास्थ्य, प्रेम संबंध या वैवाहिक जीवन हो, ग्रहों और राशियों द्वारा निर्धारित किया जाता है।  हालाँकि, आप अनुभव के आधार पर कुछ चीजों को स्वयं परख सकते हैं।  यदि हम विभिन्न ज्योतिष प्रणालियों के बारे में बात करते हैं, तो वर्तमान में सूर्य राशि और चंद्र राशि (या लग्न) को महत्वपूर्ण माना जाता है।  इन दो राशियों को देखकर आप किसी भी राशि के जातक के बारे में भविष्यवाणी कर सकते हैं। ज्योतिष शास्त्र के विद्वानों के अनुसार व्यक्ति के सटीक व्यक्तित्व को जानने के लिए लग्न और चंद्र राशियों का अध्ययन करना चाहिए।  यदि आप केवल राशियों के आधार पर ही उस व्यक्ति का भूत, भविष्य या वर्तमान बताने का प्रयास करते हैं तो आपकी भविष्यवाणी गलत भी हो सकती है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार किसी व्य...

What is the importance of Mahashivaratri ?

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महाशिवरात्रि का क्या महत्व है ? सत्य ही शिव हैं और शिव ही सुंदर है। तभी तो भगवान आशुतोष को सत्यम शिवम सुंदर कहा जाता है। भगवान शिव की महिमा अपरंपार है। भोलेनाथ को प्रसन्न करने का ही महापर्व है...शिवरात्रि...जिसे त्रयोदशी तिथि, फाल्गुण मास, कृष्ण पक्ष की तिथि को प्रत्येक वर्ष मनाया जाता है। महाशिवरात्रि पर्व की विशेषता है कि सनातन धर्म के सभी प्रेमी इस त्योहार को मनाते हैं। महाशिवरात्रि के दिन भक्त जप, तप और व्रत रखते हैं और इस दिन भगवान के शिवलिंग रूप के दर्शन करते हैं। इस पवित्र दिन पर देश के हर हिस्सों में शिवालयों में बेलपत्र, धतूरा, दूध, दही, शर्करा आदि से शिव जी का अभिषेक किया जाता है। देश भर में महाशिवरात्रि को एक महोत्सव के रुप में मनाया जाता है क्योंकि इस दिन देवों के देव महादेव का विवाह हुआ था।  हमारे धर्म शास्त्रों में ऐसा कहा गया है कि महाशिवरात्रि का व्रत करने वाले साधक को मोक्ष की प्राप्ति होती है। जगत में रहते हुए मुष्य का कल्याण करने वाला व्रत है महाशिवरात्रि। इस व्रत को रखने से साधक के सभी दुखों, पीड़ाओं का अंत तो होता ही है साथ ही मनोकामनाएं भी पूर्ण होत...

What is Venus and Malavya Yoga ?

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शुक्र एवं मालव्य योग क्या है ? सुख, संपन्नता, समृद्धि और वैभव की तमन्ना तो हर किसी को होती है, लेकिन उस वक्त मिलता है जब इंसान की कुंडली में शुक्र बलवान हो. कुंडली का शुक्र ही आपके सुख और वैभव का कारक है यानि अगर किसी इंसान को सुखी जीवन जीना हो तो सबसे पहले उसे अपनी कुंडली में शुक्र की दशा के बारे में जानना जरूरी है. बता दें, शुक्र और मंगल का षडाष्टक योग बना हुआ है. मंगल से शुक्र आठवें भाव में है और शुक्र से मंगल छठे भाव में है. शुक्र सूर्य की सिंह राशि के मघा नक्षत्र में है. शुक्र को बलवान करने से भरपूर धन की प्राप्ति हो सकती है. शुक्र से होने वाले लाभ - शुक्र ग्रह इस हिंदी के साल सम्वत 2075 का मेघेश है. - मेघ पानी बरसाता है और पानी को धन का कारक माना जाता है. - शुक्र धन की वर्षा करेगा. - शुक्र कमाल का काम करेगा. - शुक्र किस्मत चमकाएगा.  जीना हो तो सबसे पहले उसे अपनी कुंडली में शुक्र की दशा के बारे में जानना जरूरी है. बता दें, शुक्र और मंगल का षडाष्टक योग बना हुआ है. मंगल से शुक्र आठवें भाव में है और शुक्र से मंगल छठे भाव में है. शुक्र सूर्य की सिंह राशि के मघा नक्षत्र...